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Friday, August 20, 2010

अगर पेनड्राइव र्फोमट नही हो रही हो



अगर पेनड्राइव में वायरस हो और वो र्फोमट नहीं हो रही हो तो इसे र्फोमट मारने ·ा ए· आसान तरि·ा है।



just follow these steps:-

1. click on start

2..click on run

3. type cmd nad press enter




उसके बाद कुछ ऐसी विन्डो खुल जाएगी
अब बस आपको उस के आगे format लिखना है और स्पेश देकर अपनी ड्राइव जैसे g: और Entar दबायें आप·ी पेनड्राइव र्फोमट होना शुरू हो जाएगी।

Tuesday, August 17, 2010

मोबाइल को दिलाएं वायरस से आजादी


स्मार्ट होते मोबाइल फोन पर साइबर गुंडों की भी नजर है, कोई वायरस के साथ तैयार है तो कोई आपके फोन की सारी जानकारी चुराना चाहता है। मोबाइल

में जब कंप्यूटर जैसे फीचर आ जाएं और जब आप उसमें बेहद अहम-अहम डेटा रखते हैं तो वायरस के डर से आजादी बहुत जरूरी है। मोबाइल को सेफ रखने के कुछ उपायों के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं आशीष पांडे :

मोबाइल पर वायरस अटैक
सबसे पहले एक ऐसी खबर, जो किसी भी स्मार्टफोन यूजर को दहला सकती है। एंटी-वायरस बनाने वाली कंपनी कैस्परस्की ने 10 अगस्त को पहली बार नोट किया कि एंड्रॉयड फोन पर एक वायरस ने अटैक कर दिया है। SMS.AndroidOS.FakePlaye r.a नाम के इस वायरस को एंड्रॉयड फोन का पहला वायरस माना जा रहा है, जो फोन पर जाकर ऐसे नंबरों पर गुपचुप ढंग से एसएमएस करने लगता है, जिन पर प्रीमियम रेट लागू होते हैं। यानी यूजर को पता भी नहीं चलेगा और हजारों का बिल आ जाएगा।

दरअसल यह वाकया एक मिसाल है, जो बताता है कि हम लापरवाह रहे तो हमारे स्मार्टफोन पर कैसा खतरा मंडरा सकता है? इससे पहले नोकिया और सोनी एरिक्सन जैसी कंपनियों के फोन चलाने वाले सिंबियन पर भी इस तरह के कई वायरस अटैक हुए हैं। एंड्रॉयड, विंडोज मोबाइल, सिंबियन, आई-फोन... इन सभी ऑपरेटिंग सिस्टमों ने मोबाइल फोन को कंप्यूटर की टक्कर का बना दिया है। प्रोसेसर फास्ट हैं, इंटरनेट सर्फिंग एक्सपीरियंस भी किसी लिहाज से कम नहीं है और 8-16 जीबी तक की मेमरी भी हम फोन पर स्टोर करने लगे हैं।

ऐसे में फोन के लिए सिक्युरिटी कंप्यूटर के मुकाबले कम नहीं हो सकती। कंप्यूटर के लिए एंटी-वायरस बनाने वाली कंपनियों मसलन ट्रेंड माइक्रो, कैस्परस्की, क्विक हील ने मोबाइल फोन के लिए एंटी-वायरस प्रोग्राम पेश किए हैं। जानते हैं कि एंटी-वायरस प्रोटेक्शन के ये तरीके कैसे काम करते हैं।

मोबाइल पर एंटी-वायरस
- कैस्परस्की मोबाइल सिक्युरिटी
कैस्परस्की ने अपने मोबाइल सिक्युरिटी सॉफ्टवेयर का नया अपग्रेडेड 9.0 वर्जन उतारा है। यह एक मल्टिफंक्शनल प्रॉडक्ट है, जिसमें एंटी-वायरस फीचर तो हैं ही, साथ ही मैलवेयर और नेटवर्क अटैक से बचाव, चोरी होने पर प्रोटेक्शन और प्राइवेसी पर भी बेहद जोर दिया गया है। मोबाइल चोरी होने पर आप डेटा वाइप तो कर ही सकते हैं, अगर कोई सिम कार्ड बदलता है तो आपके पास पहले से दिए गए नंबर पर फोन के नए सिमकार्ड से एसएमएस आ जाएगा। मोबाइल सिक्युरिटी 9.0 सिंबियन 9.1, 9.2, 9.4 और विंडोज मोबाइल 5 से लेकर 6.5 तक वाले ऑपरेटिंग सिस्टमों पर चलता है। तीन लेवल का सिक्युरिटी सपोर्ट है, आप इसे जितना बढ़ाते हैं सॉफ्टवेयर की फायरवॉल उतना ही एक्टिव हो जाती है। फायरवॉल किसी तरह के वायरस को आने से रोकती है और बिना इजाजत कोई कनेक्शन भी नहीं बनने देती।

क्विक हील फॉर विंडोज मोबाइल
क्विक हील ने इससे पहले विंडोज मोबाइल के लिए एंटी-वायरस पेश किया था, जिसमें आपको सॉफ्टवेयर अपने फोन पर लोड करना होता है। यह विंडोज 5.0, 6.0 और 6.1 पर काम करता है और हैंडसेट पर 10 एमबी की फ्री स्टोरेज मेमरी और 5 एमबी की फ्री-प्रोग्राम मेमरी होना जरूरी है। यह आपके हैंडसेट पर किसी वायरस को आने से रोकता है। यानी आप निश्चिंत होकर फोन पर सर्फिंग और उसे दूसरी डिवाइस से कनेक्ट कर सकते हैं। इसके अलावा, मेमरी स्कैनर फोन पर पहले से स्टोर डेटा को भी स्कैन करता है। साथ ही मेमरी कार्ड को किसी इन्फेक्टेड डिवाइस से अपने हैंडसेट पर डालने पर भी यह आपको वायरस होने पर अलर्ट करेगा।

ट्रेंड माइक्रो मोबाइल सिक्युरिटी
सिंबियन एस-60, एस50 सीरीज के हैंडसेट में इसे लोड करने के लिए कम-से-कम 1.5 एमबी का स्टोरेज स्पेस और 3 एमबी का मेमरी स्पेस होना चाहिए। विंडोज 5 से लेकर 6.1 और 5.5 में लोड करना हो तो फोन में 4 एमबी का स्टोरेज स्पेस और 3 एमबी का मेमरी स्पेस चाहिए। यह आपको ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए एंटी-वायरस और एंटी-फिशिंग का प्रोटेक्शन तो देता ही है, साथ ही आप ऑटो और मैनुअल स्कैन भी कर सकते हैं। पैरंटल कंट्रोल से आप फोन की लॉग-बुक हासिल कर सकते हैं, ताकि पता चल सके कि कहां कॉल की गई और क्या मेसेज आए? फोन खो जाए तो एक मेसेज से उसका सारा डेटा वाइप यानी डिलीट किया जा सकता है ताकि आपकी सीक्रेट जानकारी किसी के हाथ न लगे। इसी तरह एक मेसेज से फोन का सिम कार्ड बदलने पर उसे लॉक करने का फीचर भी है। 3.0 वर्जन में आपको फायरवॉल, एंटी-वायरस और किसी बाहरी प्रोग्राम की घुसपैठ रोकने वाला इंट्रयूजन डिटेक्शन फीचर मिलता है।

एफ सिक्योर
ऊपर बताए गए सभी एंटी-वायरस प्रोग्राम वाले स्टैंडर्ड फीचर आपको इसमें मिलते हैं। साथ ही यह ब्राउजिंग प्रोटेक्शन से आपको मोबाइल फोन पर सेफ सर्फिंग के लिए भी आगाह करता है। जब भी आप डेटा कनेक्ट करते हैं, यह अपना एंटी-वायरस सूचना स्टोर अपडेट करता रहता है। आपने अगर ऑनलाइन कनेक्शन इस्तेमाल नहीं किया है तो एसएमएस अपडेट से आपको मैलवेयर अपडेट भेजे जाते हैं। फायरवॉल की मजबूती आपको हैकिंग और वॉर्म अटैक से बचाती है, हालांकि एंड्रॉयड वर्जन में फायरवॉल नहीं दी गई है।

पीसी टु मोबाइल स्कैन
एंटी-वायरस कंपनी क्विक हील ने पिछले दिनों इस तरह का प्रोग्राम पेश किया है। इसमें आजादी यह है कि आपको फोन पर एंटी- वायरस लोड करने का झंझट नहीं रहता और इसमें मेमरी खर्च होने का सिरदर्द भी नहीं है। आपको बस मोबाइल को यूएसबी से पीसी के साथ कनेक्ट करने या फिर ब्लू टूथ के जरिए कनेक्शन बनाना होता है। इसके बाद जब आप मोबाइल स्कैन करते हैं तो एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर स्टोरेज मेमरी से लेकर ऑपरेटिंग सिस्टम और सिस्टम फाइल्स तक को स्कैन करता है।PC2Mobile स्कैन नाम का यह प्रॉडक्ट सिंबियन, विंडोज मोबाइल ओएस, लिनक्स आधारित ओएस के अलावा एपल, ब्लैकबेरी, एचटीसी व सभी अन्य ब्रैंड के फोन के लिए कारगर साबित होता है।

कितना खर्च मोबाइल सिक्युरिटी प्रॉडक्ट के प्राइस अलग-अलग हैं। कैस्परस्की का 9.0 वर्जन आपको वेबसाइट पर एक फोन के लिए एक साल के लिए 699 रुपये में मिलता है तो एफ-सिक्योर का एक फोन के लिए एक साल का पैकेज 2499 रुपये का है। नॉर्टन का अमेरिका बाजार में तो मोबाइल प्रॉडक्ट है लेकिन भारतीय वेबसाइट में ऐसी कोई जानकारी हमें नजर नहीं आई। ट्रेंड माइक्रो का कहना है कि उसके प्रॉडक्ट का दाम ऑन रिक्वेस्ट ही उपलब्ध है। इसके अलावा, कुछ पीसी टु मोबाइल स्कैन प्रॉडक्ट ऐसे हैं, जो कंपनियां आपको कंप्यूटर के एंटी-वायरस के साथ मुफ्त देती हैं।

सटीक कीमत जानने के लिए सॉफ्टवेयर डीलर से संपर्क करें। आप अगर स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो उनके ऑफिशल एप्लिकेशन स्टोर पर आपको ऐसे प्रॉडक्ट मिल जाएंगे, जो एंटी-वायरस, रिमोट वाइप और लोकेशन पहचाने के फीचर देते हैं, इनमें लुकआउट मोबाइल सिक्युरिटी और wheresMyPhone जैसे एप्स बेहद पॉपुलर हैं और लगभग हर स्टोर पर मिल जाते हैं।

Thursday, August 12, 2010

रिंगटोन बनाने के लिए बढिय़ा सॉफ्टवेयर है Dj ToneXpress Ringtone Maker



डीजे Dj ToneXpress Ringtone Maker रिंगटोन अपने पीसी में संगीत संग्रह से असीमित अनुकूलन रिंगटोन बनाने के लिए, सीडी और यूट्यूब वीडियो, व मुफ्त एसएमएस संदेश भेजने के लिए, अपने खुद के मोबाइल वैप साइट बनाने के लिए, एक के लिए मोबाइल सामग्री स्टोर करने के लिए हैरत की बात है प्रोग्राम इंटरफ़ेस नेविगेट करने के लिए सरल है। इसे डाऊनलोड करने के लिए Dj ToneXpress Ringtone Maker यहां चटका लगाएं

Wednesday, August 11, 2010

रमजान में मुसलमानों के काम आने वाला सोफ्टवेयर




इसे डाउनलोड करने के लिए यहां चटका लगाएं

कैसे मिले इंटरनेट की बेहतर स्पीड

मोबाइल फोन को पीसी से कनेक्ट करके इंटरनेट का यूज

इंटरनेट की स्पीड कई चीजों पर निर्भर करती है। मसलन आपके कंप्यूटर की स्पीड, मॉडम/राउटर और कंप्यूटर के बीच कनेक्शन की स्पीड और मॉडम/राउटर से आईएसपी तक की स्पीड। आपको यह बात समझ लेनी चाहिए कि इन तीनों में से जो स्पीड सबसे कम होगी, आपको अपने इंटरनेट पर वही स्पीड मिलेगी। चूंकि आप मॉडम के तौर पर मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए ऐसा मान सकते हैं कि आप जीपीआरएस का यूज कर रहे होंगे। हम यह भी मानकर चल रहे हैं कि आपके पास एक अच्छा कंप्यूटर है, जिसमें भरपूर रैम है। इसके अलावा आपके पास एक अच्छा प्रॉसेसर है, जिसकी हार्ड डिस्क में 5 से 7 जीबी का फ्री स्पेस है।

अगर आप यूएसबी केबल के जरिए कंप्यूटर को मोबाइल से कनेक्ट करते हैं, तो कंप्यूटर और मोबाइल के बीच डेटा 300 से 400 मेगा बिट्स प्रति सेकंड की दर से ट्रांसफर होगा। ब्लूटुथ कनेक्शन की स्पीड करीब 3 मेगाबिट्स प्रति सेकंड है, जबकि जीपीआरएस कनेक्शन 50 किलोबाइट की दर से डेटा ट्रांसफर कर सकता है, जो ब्लूटुथ कनेक्शन के मुकाबले काफी कम है। यहां यह भी साफ है कि यूएसबी केबल ब्लूटुथ के मुकाबले 100 गुना तेज स्पीड दे सकता है। चूंकि कम स्पीड जीपीआरएस की वजह से है इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप केबल कनेक्शन का यूज कर रहे हैं या ब्लूटुथ कनेक्शन का, इंटरनेट आपको तब तक वही स्पीड देता रहेगा, जब तक आप 3जी कनेक्शन या किसी ऐसे मोबाइल कनेक्शन का यूज नहीं करते, जो अच्छी स्पीड देता हो।

मोबाइल फोन में ऑपरेटिंग सिस्टम क्या बला है?



मोबाइल फोन में ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) क्या बला है? आपके मन में छिपे इसी सवाल को दूर करने के लिए हम टेक्नो-ट्रिक्स में यह स्पेशल सीरीज लाए हैं। चार और ऐसे ओएस के बारे में बता रहे हैं, जिन पर सबसे ज्यादा मोबाइल फोन काम कर रहे हैं :

आई-ओएस
यह एपल का मोबाइल फोन ऑपरेटिंग सिस्टम है, यानी इस पर आई-फोन काम करता है। इसके अलावा आई-पॉड टच और पिछले दिनों लॉन्च हुई एपल की टैब्लेट डिवाइस आई-पैड भी इसी पर चलती है। इसे ऐप्लिकेशन डिवेलप करने वालों में सबसे पॉपुलर प्लैटफॉर्म माना जाता है। इस साल जून में एपल ने इस ऑपरेटिंग सिस्टम का चौथा वर्जन पेश किया था। पहले इस ओएस को आईफोन-ओएस कहा जाता था लेकिन इसी साल इसका नाम आई-ओएस कर दिया गया है।

यह पहला ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम था, जिसने लोगों के बीच टचस्क्रीन फोन की पॉपुलैरिटी को नए मुकाम तक पहुंचाया। लोगों को पहली बार वाकई किसी फोन को इस्तेमाल करते हुए मजा आ रहा था और फिर तो इसकी बस नकल शुरू हो गई। लेटेस्ट वर्जन में मल्टिटास्किंग का फीचर भी आ गया है यानी आप एक साथ कई ऐप्लिकेशन में काम कर सकते हैं। लेकिन सबसे पहले इसने जिस तरह मल्टिटच वाला इंटरफेस दिया, वह गजब का था। फ्लुइड इंटरफेस पर स्वाइप, पिंच, टैप, स्लाइड, कुछ भी इतनी आसानी से कर सकते थे, जो पहले कभी नहीं देखा गया। हालांकि अब ये फीचर कई ऑपरेटिंग सिस्टमों और हैंडसेटों पर हैं, लेकिन आज तक कोई दूसरा आई-ओएस की बराबरी नहीं कर पाया है।

ऐप्लिकेशन: ऐप्लिकेशन के मामले में एपल का एप स्टोर बेजोड़ है। इसमें करीब 2.25 लाख थर्ड पार्टी ऐप्लिकेशन हैं। इससे अब तक करीब पांच अरब डाउनलोड हो चुके हैं। एपल का फॉर्म्युला है कि ऐप्लिकेशन की बिक्री से होने वाली कमाई का 70 फीसदी डिवेलपर को जाता है और 30 फीसदी उसे मिलता है।

ब्लैकबेरी ओएस
कनाडा की कंपनी रिसर्च इन मोशन (आरआईएम यानी रिम) का मोबाइल फोन ब्लैकबेरी सबसे पसंदीदा स्मार्ट फोन्स में गिना जाता है। इस ओएस ने ब्लैकबेरी को उसके सबसे पॉपुलर फीचर ई-मेल को बेहद फास्ट और भरोसेमंद बनाया है। कॉरपोरेट ई-मेल अकाउंट का माइक्रोसॉफ्ट एक्सचेंज सर्वर या लोटस के साथ कॉन्टैक्ट्स, कैलेंडर, नोट्स, टास्क, सब कुछ सिंक करने के फीचर ने ब्लैकबेरी को एग्जिक्यूटिव्स के बीच नंबर वन फोन बनाया है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम ट्रैकबॉल, ट्रैकपैड और टचस्क्रीन, तीनों से इनपुट लेने के हिसाब से तैयार किया गया है। हालांकि ब्लैकबेरी का अकेला टचस्क्रीन फोन स्टॉर्म वह धमाल नहीं कर पाया, जिसकी उम्मीद थी। लेकिन अब ब्लैकबेरी अपने ऑपरेटिंग सिस्टम का 6.0 वर्जन ला रही है।

माना जा रहा है कि टचस्क्रीन फोन के बाजार में यह नया अपडेट ब्लैकबेरी को बेहद ताकतवर बना देगा। इस खबर के बाद से रिसर्च इन मोशन के शेयरों में तेजी भी दर्ज की गई थी। कहा जा रहा है कि यह आई-फोन के लिए ब्लैकबेरी का सीधा चैलेंज होगा। ब्लैकबेरी 9800 इस पर चलने वाला पहला फोन होगा।

ऐप्लिकेशन: रिसर्च इन मोशन ने ब्लैकबेरी एप वर्ल्ड के नाम से यह सर्विस पिछले साल अप्रैल से शुरू की। इस वक्त एप वर्ल्ड में करीब 5500 से ज्यादा ऐप्लिकेशन हैं। जल्द ही एप वर्ल्ड का 2.0 वर्जन आ रहा है।

विंडोज मोबाइल
जो ओएस कंप्यूटर की दुनिया का बादशाह है, उसका मोबाइल में सिक्का नहीं जम पाया। विंडोज को लेकर लोगों में काफी उम्मीदें जगीं लेकिन इस पर चलने वाले फोन अपनी जगह नहीं बना पा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने अब ऐलान किया है कि वह बहुत जल्द विंडोज फोन 7 लेकर आएगी जो बाकी स्मार्टफोन की नींद उड़ा सकता है। हालांकि इस नए ओएस पर चलने वाले फोन का इंतजार है। दो फीसदी स्मार्टफोन मार्केट शेयर के साथ यह पांचवें नंबर पर खिसक चुका है। इसका करंट वर्जन विंडोज 6.5 है जो इसके पुराने वर्जन 6.1 का अपडेट भर है।

फीचर और लुक्स के हिसाब से इसे काफी कुछ पीसी के ओएस की तरह रखा गया ताकि लोगों को एक सा अहसास मिले। माइक्रोसॉफ्ट अब पूरा दांव विंडोज फोन 7 के साथ खेल रही है जिसे टचस्क्रीन के हिसाब से खासतौर पर तैयार किया गया है। पुराने वर्जन पर चल रहे विंडोज फोन 7 में अपग्रेड नहीं कर पाएंगे। विंडोज 6.5 पर चलने वाले फोन्स में इस वक्त सैमसंग ओमनिया प्रो बी 7320, एसर बी टच ई200, एचटीसी टच2, टच विवा और टच डायमंड खास हैं। पाम ट्रियो और आसुस पी 527 भी विंडोज फोन हैं।

बाडा ओएस
सैमसंग ने इस साल अपना नया ऑपरेटिंग सिस्टम लॉन्च किया है, जिसका मकसद कम कीमत में स्मार्टफोन को सपोर्ट करना है। बाडा कोरियन भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है सागर। फिलहाल यह एक ही हैंडसेट सैमसंग वेब पर उपलब्ध है लेकिन सैमसंग ने जाहिर किया है कि जल्द ही इस पर आधारित कई फोन लाए जाएंगे। वेब को इस साल जून में ही लॉन्च किया गया था। सैमसंग ने एंड्रॉयड को भी अपनाया है लेकिन उसके अधिकतर फीचर फोन हैं। कंपनी का इरादा फीचर फोन को बाडा पर लाकर स्मार्टफोन के तौर पर पेश करने का है। बाडा के लिए बाकायदा डिवेलपर कम्यूनिटी बना दी गई है और इस वक्त करीब 700 ऐप्लिकेशन इसके स्टोर में हैं। इनमें से 70 फीसदी फ्री हैं। इस साल के आखिर तक एप्स की तादाद 3000 तक पहुंच सकती है।

Tuesday, August 10, 2010

ऑनलाइन हिन्दी की बोर्ड




अगर आप हिन्दी में टाइप नहीं कर पाते हैं तो उसका एक इलाज है www.gate2home.com पर जी हां ऑनलाइन हिन्दी टाइपिंग और वो भी बहूत सारी भाषाओं में उपलब्ध है,इस की बोर्ड पर जाने के लिए ऑनलाइन हिन्दी टाइपिंग यहां चटका लगाएं।